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Monday, February 20, 2017

भारतीय सेना का दिल को झंकझोर के रख देने वाला वीडियो!!



हम आज आपके लिए जो विडीओ क्लिप लेकर आए हैं हमें लगता है ये आपके देखे हुए आज तक के सारे विडीओ क्लिप्स में सबसे शानदार साबित होने वाला है। ये विडीओ देशभक्ति से भरा है, इसमें जोश भी है और महानता भी। यह वीडियो क्लिप सेना पर सवाल उठाने वाले कन्हैया कुमार, ओम् पूरी और कुछ चंद घटिया एवं गद्दार जैसे लोगों की पोल खोल देगाl
भारतीय सेना:- तुम हो तो हम हैं!!
सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत से लोग हैं जो मोदी विरोध करते करते देश का विरोध करने लग पड़े हैं। उन लोगों के विचारों और मुँह पर भी ये विडीओ क्लिप बेहद करारा तमाचा है! अब ज़्यादा ना लिखते हुए हम आपसे ये शानदार विडीओ क्लिप देखने का अनुरोध करते हैं।


कौन है वह जो भटक रहा है धरती पर 3000 वर्षों से धर्म की रक्षा हेतु धर्म युद्ध के लिए!!!



वह जो 3000 वर्षों से धरती पर भटक रहा है धर्म की रक्षा हेतु जो आज भी जीवित है धर्म युद्ध के लिए!!

यह एक उस इन्सान के बारे में कहानी है जिसके बारे में कहा जाता है कि वो धरती पर 5000 से 6000 वर्षों तक जीवित रहेगा। कुछ लोग मानते हैं कि वह 3000 वर्षों तक धरती में अलग-अलग इन्सान के रुप लेकर यहां से वहां भटकता रहेगा। बहुत से लोगों का ऐसा भी मानना है कि यह जीवित है किसी एक बड़े धर्म युद्ध के लिए।
अलग-अलग लोगों की अलग-अलग मान्यता है। यह वह इंसान है जो महाभारत काल से जीवित है, और आज भी कई लोगों को दिखाई देते हैं। महाभारत काल से लेकर आज तक यह योद्धा धरती के अलग-अलग स्थानों पर भटक रहा है।

मगर ऐसा क्यों? क्या सच में यह एक धर्म युद्ध के लिए जीवित है? दयावान भगवान ने ऐसे योद्धा को इतना गंभीर श्राप क्यों दिया?
महाभारत युद्ध में ऐसी क्या गलती की थी इस योद्धा ने जिसका इसको इतना बड़ा मूल्य चुकाना पड़ रहा है?

महाभारत युद्ध में तो बड़े-बड़े छल हुए थे, पाप हुए थे, तो किसी और को तो ऐसी सजा नहीं मिली!
अगर भगवान कृष्ण पर आपका अटूट विश्वास है और आप मानते हैं कि भगवान कृष्ण तो गलती कर नहीं सकते, तो आप भी जानते होंगे इसके पीछे भी कोई-न-कोई कारण अवश्य रहा होगा। और अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आप बिल्कुल सही है, भगवान कृष्ण ने बहुत आगे की सोच कर ही इस योद्धा को ऐसा श्राप दिया। कौन है वह महान योद्धा जो ऐसे धरती पर यहां से वहां भटक रहा है? क्या है उसका नाम?

अर्जुन ने अपनी तलवार से अश्वत्धामा के सिर के केश काट डालें और उसके मस्तक से मनी निकाल डाली जिसके कारण वह श्रीहीन हो गया। उसके पश्चात भगवान श्री कृष्ण ने अश्वत्धामा को 6000 वर्ष तक यूंही भटकने का श्राप दिया। केश काटने के पश्चात अर्जुन ने अश्वत्धामा को अपने शिविर से बाहर निकाल दिया। जिस कारण से इस महान योद्धा का नाम महाभारत की हिंसा और अभिशाप में खों सा गया।
इसके पीछे का कारण:-

कहानी कुछ इस प्रकार है कि एक बार तो सब ने अश्वधामा को माफ करने को कहा किंतु भगवान श्रीकृष्ण ने उसको धरती पर भटकने का श्राप दे दिया। ऐसा क्या हुआ था की भगवान श्री कृष्ण ने उसे माफ़ ना करते हुए श्राप दे दिया?

इसका जवाब हमें भविष्य पुराण में मिलता है…

सनातन धर्म की पुस्तक भविष्य पुराण में लिखा गया है कि आने वाले वक्त में सनातन धर्म पर घोर संकट आएगा। तब इंसानों की सोच बहुत गिर चुकी होगी और संसार हर तरफ से सनातन धर्म को समाप्त करने की कोशिश में लगा होगा। यह वक्त कलयुग के अंत में होगा।
ऐसा कहा जाता है की उस समय ही भगवान विष्णु का “कल्कि” अवतार आएगा और उस समय कल्कि अवतार की सेना में अश्वत्थामा भी मौजूद होंगे।

ऐसा केवल भविष्य पुराण में ही नहीं है बल्कि अलग अलग पुराणों में इसका जिक्र किया गया है जिसमें यह भी कहा गया है कि जो लोग हजारों वर्षों से जीवित है और यहां वहां भटक रहे हैं यह सब कल्कि भगवान की सेना में शामिल होकर अधर्म के विरुद्ध युद्ध लड़ेंगे।

पुनर्जन्म से जुड़े कुछ रहस्य व् रोचक जानकारी!!



क्या पुनर्जन्म होता है?

पुनर्जन्म यह धारणा है कि व्यक्ति मृत्यु के पश्चात पुनः जन्म लेता है। हम ये कहें कि कर्म आदि के अनुसार कोई मनुष्य मरने के बाद कहीं अन्यत्र जन्म लेता है।

पाश्चात्य मत में सामान्यतः पुनर्जन्म स्वीकृत नहीं है क्योंकि वहाँ ईश्वरेच्छा और यदृच्छा को ही सब कुछ मानते हैं। कहा जाता है, यदि व्यक्ति का पुनर्जन्म होता है तो उसे अपने पहले जन्म की याद क्यों नहीं होती? भारतीय मत इसका उत्तर देता है कि अज्ञान से आवृत्त होने के कारण आत्मा अपना वर्तमान देखती है और भविष्य बनाने का प्रयत्न करती है, पर भूत को एकदम भूल जाती है। यदि अज्ञान का नाश हो जाए तो पूर्वजन्म का ज्ञान असंभव नहीं है। भारत की पौराणिक कथाओं में इस तरह के अनेक उदाहरण हैं और योगशास्त्र में पूर्वजन्म का ज्ञान प्राप्त करने के उपाय वर्णित हैं।

पुनर्जन्म पर हमेशा से ही भ्रम रहा है। कई लोगों ने इसे माना है तो कई लोगो को आज भी इस पर संदेह है। विज्ञान की बात करें तो विज्ञानिकों में भी अभी तक इसपर भ्रम ही है। हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्य का केवल शरीर मरता है उसकी आत्मा नहीं। आत्मा एक शरीर का त्याग कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है, इसे ही पुनर्जन्म कहते हैं। हालांकि नया जन्म लेने के बाद पिछले जन्म कि याद बहुत हि कम लोगो को रह पाती है। इसलिए ऐसी घटनाएं कभी कभार ही सामने आती है। पुनर्जन्म की घटनाएं भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों मे सुनने को मिलती है।
इतिहास एवं विकास

आत्मा के अमरत्व तथा शरीर और आत्मा के द्वैत की स्थापना से यह शंका होती है कि मरण के बाद आत्मा की गति क्या है। अमर होने से वह शरीर के साथ ही नष्ट हो तो नहीं सकती। तब निश्चय ही अशरीर होकर वह कहीं रहती होगी। पर आत्माएँ एक ही अवस्था में रहती होंगी, यह नहीं स्थापित किया जा सकता, क्योंकि सबके कर्म एक से नहीं होते। अतएव ऋग्वेदकालीन भारतीय चिंतन में आत्मा के अमरत्व, शरीरात्मक द्वैत तया कर्मसिद्धांत की उपर्युक्त प्रेरणा से यह निर्णय हुआ कि मनुष्य के मरण के बाद, कर्मों के शुभाशुभ के अनुसार, स्वर्ग या नरक प्राप्त होता है।

आईए जानते है पुनर्जन्म से जुड़ी कुछ और रोचक जानकारी:-

1). ऐसा नहीं हैं कि हर मौत के बाद को इंसान इंसान के रुप में ही जन्म ले. वो अगले जन्म में क्या बनेगा ये उसके कर्मों पर भी निर्भर करता है, कई बार मनुष्य को पशु योनि भी मिलती हैं।

2). अधिकतर बार मनुष्य, मनुष्य के रूप में जन्म लेता है. लेकिन कई बार वो पशु रूप में भी जन्म लेता है जो कि उसके कर्मों पर निर्भर करता है।
3).  कई बार हम देखते हैं कि हम किसी का बुरा नहीं चाहते है, लेकिन फिर भी हमारे साथ बुरा होता है. इसकी वजह है पिछले जन्मों के कर्म जो कि मनुष्य को भोगना ही पड़ते हैं. ये बात अलग है कि अच्छे कर्मों की वजह से सुख भी मिलता हैं।

4). हिन्दू मानते हैं कि केवल यह शरीर ही नश्वर है जो कि मरने के बाद नष्ट हो जाता है. शायद इसीलिए मृत्यु क्रिया के समय सिर पर मारकर उसे तोड़ दिया जाता है जिससे कि व्यक्ति इस जन्म की सारी बातें भूल जाये और अगले जन्म में इस जन्म की बातें उसे याद ना रहे. उनका मानना है कि आत्मा बहुत ऊंचाई में आकाश में चली जाती है जो कि मनुष्य की पहुँच से बाहर है और यह नए शरीर में ही प्रवेश करती है।

5). कहा जाता है कि मुक्ति सिर्फ मानव जन्म में ही मिलती है. कहते है कि मानव जीवन अनमोल है, इसके लिए उसे 84 लाख योनियों से गुजरना पड़ता हैं, तब जाकर मनुष्य जीवन मिलता हैं।
6). पुराणों में कई कथाएं भी ‌मि्लती हैं जो यह बताती हैं किर मृत्यु के समय व्यक्तिण की जैसी चाहत और भावना होती है उसी अनुरूप उसे नया जन्म मि लता है. एक कथा राजा भारत की है जो हि रण के बच्चे‌ के मोह में ऐसे फंसे किय अपने आखिरी वक्त में उसके ख्यालों में खोए रहे. इसका परिणाम ये हुआ किे पुण्यात्मा होते हुए भी वो अगले जन्म में पशु योनी में पहुंच गए और हिारण बने।

7). सबसे चौंकाने वाला तथ्य ये हैं कि इंसान सात बार पुरुष या स्त्री बनकर ये शरीर धारण करता है और उसे यह अवसर मिलता है कि वह अच्छे या बुरे कर्मों द्वारा अपना अगला भाग्य लिखे।

8). कुछ ऋषियों के अनुसार पूर्वजन्म के समय हमारे दिमाग में हर चीज रहती है लेकिन बहुत कम बार ही ऐसा होता है कि इंसान को उसके पिछले जन्म की बातें याद रहें इसका मतलब है कि हमारे पूर्व जन्मों की बातें हमारे दिमाग में रिकॉर्ड रहती हैं लेकिन हम इन्हें कभी याद नहीं कर पाते हैं।

9).  पुनर्जन्म के लिए महाभारत में एक कथा का उल्लेख है कि भीष्म श्रीकृष्ण से पूछते हैं – आज मैं वाणों की शैय्या पर लेटा हुआ हूं, आखिर मैंने कौन सा ऐसा पाप किया था जिसकी ये सजा है. भगवान श्री कृष्ण कहते हैं – आपको अपने छः जन्मों की बातें याद हैं लेकिन सातवें जन्म की बात याद नहीं है जिसमें आपने एक नाग को नागफनी के कांटों पर फेंक दिया था. यानी भीष्म के रुप में जन्म लेने से पहले उनके कई और जन्म हो चुके थे।

अद्भुत रहस्य:- जानिये आखिर कैसे पायें मृत्यु पर विजय!!!


“कैसे पायें मृत्यु पर विजय पढ़िए इस लेख में”
आपको सुनने में अजीब लगेगा कि आखिर कैसे कोई मृत्यु पर विजय पा सकता है, हो सकता है आप हँसेंगे और महज इसको एक अन्धविश्वास ही समझेंगे, ये हम सभी जानते हैं कि जिसने जन्म लिया है उसका मरना स्वभाविक है पर आज हम आपको एक ऐसे बालक के बारे में बताने जा रहे जिसने भगवान शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न करके अमरत्व पाया और अपनी मृत्यु को पराजित किया। जानिए इस कथा के बारे में….

सृष्टि का प्रारम्भ कैसे हुआ किसने किया ये हम आपको अपने पहले लेख में बता चुकें हैं। प्राचीनकाल के समय की बात है, सृष्टि का आरम्भ होने के बाद महामुनि मृगश्रृंग के पुत्र श्री मार्कण्डेय जी ने अपने पूज्य पिता जी को देखकर अत्यंत विनम्रता से कहा- ‘आज आप बहुत दुखी और उदास दिखाई दे रहे हैं। आप की चिंता का क्या कारण है? आपको चिंतित देखकर मेरा हृदय बहुत परेशान हो रहा है।

महामुनि मृगश्रृंग ने कहा-‘बेटा!- तुम्हारी माता मरूधिति को कोई संतान न होने से मैंने उसके साथ तपस्या करके नागधारी शिव को प्रसन्न किया था। तब श्री महेश्वर ने प्रकट होकर हमसे वर मांगने के लिए कहा। कृतार्थ जीवन होकर मैनें पारवती बल्लभ से याचना की- कि अब तक मुझे कोई संतान नहीं हुई। मैं आपसे एक पुत्र चाहता हूँ। मैंने तुरंत प्रभु के चरणों में निवेदन किया- मैं मूर्ख, गुणहीन पुत्र नहीं चाहता, मुझे अनुपम, गुणवान एवं सर्विज्ञ पुत्र ही चाहिए चाहे उसकी उम्र कम ही क्यों न हो!
“भगवान शंकर ने कहा”

महामुनि मृगश्रृंग की प्रार्थना सुनने के बाद भगवान शिव शंकर “तथास्तु” कहकर अंतर्ध्यान हो गए। उसके बाद महामुनि मृगश्रृंग ने अपने बेटे से कहा मैंने जो भगवान शिव से प्रार्थना की थी स्वीकार हुई और तुम्हारे अंदर भोलेनाथ के अद्भुत गुण विधमान हैं तुमसे हम दम्पति अतयंत सुखी और गौरवान्वित है’ महामुनि मृगश्रृंग ने कुछ रूककर बहुत हलके स्वर में बेटे से कहा- ‘अब तुम्हारा सोहलवा वर्ष समाप्त हो चला है’ और तुम्हारा समय अत्यंत समीप है।
इतना सुनने के बाद श्री मार्कण्डेय जी नें अत्तयंत गंभीरता से अपने पिता जी को आश्वत करने के लिए बहुत ही सरल शब्दों में कहा। -“आप मेरे लिए चिंता न करें”। भगवान शिव महेश्वर कल्याणस्वरूप एवं अभीष्ट फलदाता हैं। में उनके मंगलमय चरणों का आश्रय लेकर, उनकी तपस्या एवं उपासना करके अमरत्व प्राप्त करने का प्रयत्न करूँगा।


तभी श्री मार्कण्डेय जी अपने माता- पिता के चरणों की धूल मस्तक पर लगाकर भगवान महादेव शंकर का स्मरण करते हुए दक्छिन समुद्र के तट पर पहुंचे। उन्होंने अपने ही नाम पर शिवलिंग की स्थापना की और त्रिकाल- स्नान करके बड़ी ही श्रद्धा से भगवान मृतुन्जय की उपासना करने लगे। भगवान शंकर तो महादेव ठहरे। एक ही दिन में प्रसन्न होकर उन्होनें श्री मार्कण्डेय जी को निहाल कर दिया।
अचानक से मार्कण्डेय जी चौंक गए..
अपनी मृत्यु के दिन श्री मार्कण्डेय जी अपने आराध्या की पूजा करके स्तोत्र- पाठ करना ही चाहते थे कि तभी चौंक गए। उनके कोमल कंठ में कठोर पाश पद गया। श्री मार्कण्डेय जी नें दृस्टि उठकर देखा तो उनके सम्मुख भयानक काल खड़े थे। श्री मार्कण्डेय जी निवेदन किया- ‘महामते काल! आप थोड़ी देर ठहरें’, में अपने प्राणप्रिय मृत्युनज्य स्त्रोत का पाठ कर लूँ’। इतना सुनने के बाद महाकाल नें कहा “काल किसी की प्रतीक्षा नहीं करता” बालक तुम्हारे लिए भी समय नहीं है।

काल ने क्रोधित होकर श्री मार्कण्डेय जी का प्राण-हरण करने के लिए पाश खींचना ही चाहा की दूर जा गिरे। महाकाल पीड़ा से कांपने एवं भय से चटपटानें लगे। मार्कण्डेय जी द्वारा बनाये गए शिवलिंग से साक्षात भगवान शंकर ने प्रकट होकर अत्तयंत क्रोध से काल के वक्ष पर कठोर पदाघात किया था।

महाकाल की दुर्दशा एवं अपने आराध्या का अनुपम रूप- लावण्य देखकर श्री मार्कण्डेय जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने भगवान शंकर के चरणों में अपना मस्तक रख दिया। हृदय से भक्ति रस की नवीन मन्दाकिनी वाणी द्वारा स्तुति के रूप में प्रवाहित होने लगी– ‘चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः’। उसके बाद देवादिदेव महेश्वर महादेव नें उन्हें अमरत्व प्रदान कर दिया और बाद में महाकाल भगवान शिव से क्षमा मांगकर वंहा से प्रस्थान कर गए।

मंत्र इस प्रकार है –

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।  उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इसे मृत्यु पर विजय पाने वाला महा मृत्युंजय मंत्र कहा जाता है। इस मंत्र के कई नाम और रूप हैं। इसे शिव के उग्र पहलू की ओर संकेत करते हुए रुद्र मंत्र कहा जाता है; शिव के तीन आँखों की ओर इशारा करते हुए त्रयंबकम मंत्र और इसे कभी कभी मृत-संजीवनी मंत्र के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह कठोर तपस्या पूरी करने के बाद पुरातन ऋषि शुक्र को प्रदान की गई “जीवन बहाल” करने वाली विद्या का एक घटक है।


“महामृत्युंजय मंत्र” भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है। मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र से शिवजी को प्रसन्न करने वाले जातक से मृत्यु भी डरती है। इस मंत्र को सिद्ध करने वाला जातक निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त करता है। यह मंत्र ऋषि मार्कंडेय द्वारा सबसे पहले पाया गया था।
ऋषि-मुनियों ने महा मृत्युंजय मंत्र को वेद का ह्रदय कहा है। चिंतन और ध्यान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनेक मंत्रों में गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र का सर्वोच्च स्थान है।
महामृत्युंजय मंत्र मंत्र का अक्षरशः अर्थ:-
त्रयंबकम् = त्रि-नेत्रों वाला (कर्मकारक)
यजामहे = हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं, हमारे श्रद्देय
सुगंधिम्= मीठी महक वाला, सुगंधित (कर्मकारक)
पुष्टिः = एक सुपोषित स्थिति, फलने-फूलने वाली, समृद्ध जीवन की परिपूर्णता
वर्धनम् = वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है, (स्वास्थ्य, धन, सुख में) वृद्धिकारक; जो हर्षित करता है, आनन्दित करता है और स्वास्थ्य प्रदान करता है, एक अच्छा माली
उर्वारुकम= ककड़ी (कर्मकारक)
इव= जैसे, इस तरह
बन्धनात्= तना (लौकी का); (“तने से” पंचम विभक्ति – वास्तव में समाप्ति -द से अधिक लंबी है जो संधि के माध्यम से न/अनुस्वार में परिवर्तित होती है)
मृत्योः = मृत्यु से
मुक्षीय = हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें
मा= न
अमृतात्= अमरता, मोक्ष
ओम त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठर के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं। उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं। इन तैंतीस देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं। साथ ही वह नीरोग, ऐश्व‍र्य युक्ता धनवान भी होता है। महामृत्युंरजय का पाठ करने वाला प्राणी हर दृष्टि से सुखी एवम समृध्दिशाली होता है। भगवान शिव की अमृतमययी कृपा उस निरन्तंर बरसती रहती है।

सरल अनुवाद:-

हम त्रि-नेत्रीय वास्तविकता का चिंतन करते हैं जो जीवन की मधुर परिपूर्णता को पोषित करता है और वृद्धि करता है। ककड़ी की तरह हम इसके तने से अलग (“मुक्त”) हों, अमरत्व से नहीं बल्कि मृत्यु से हों।

कलियुग में केवल शिवजी की पूजा फल देने वाली है। समस्तं पापं एवम् दु:ख भय शोक आदि का हरण करने के लिए महामृत्युजय की विधि ही श्रेष्ठ है। निम्निलिखित प्रयोजनों में महामृत्युजंय का पाठ करना महान लाभकारी एवम् कल्याणकारी होता है।

पतला, छोटा या टेढ़ा है? तो चिंता बिलकुल न करें.. जानिए ये 12 आयुर्वेदिक उपचार!!



जी हाँ यदि आपका लिंग पतला, छोटा या उसमे टेढ़ापन है है? तो चिंता करने की कोई बात नहीं है…. क्यूंकि अब आप आयुर्वेदिक पद्धति से घर बैठे उपचार कर सकते हैं!!

अगर आपका लिंग छोटा या पतला है तो करें ये उपचार!! युवा काल में लिंग के आकार के प्रति चिंता एवं उत्सुकता लगभग हरेक पुरुष मे होती है, परन्तु यह ध्यान देने वाली बात है कि हर पुरुष के लिंग मे लंबाई, मुटाई तथा स्थिरता में भिन्नता तो अवश्य होती है पर इस भिन्नता का यौन संतुष्टी, गर्भाधारण तथा यौन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पडता. वास्तव में स्त्री के योनि का उपरी एक तिहाई भाग ही यौन स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है।
उत्तेजित अवस्था मे यदि शिश्न की लंबाई केवल 2 से.मे. भी हो तो वह अपने यौन साथी को प्रयाप्त यौन आनंद प्रदान करा पाने मे सक्ष्म होता है. अतः आप चिंता ना करें और बहलाने वाले विज्ञापनों के चक्कर में पडकर अपने शिश्न की लंबाई, मोटाई एवं उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन कदापि ना करें, इससे फायदा तो दुर नुकसान अवश्य हो सकता है।

1.) शतावर, असगंधा, कूठ, जटामांसी और कटेहली के फल को 4 गुने दूध में मिलाकर या तेल में पकाकर लेप करने से लिंग मोटा होता है और लिंग की लम्बाई भी बढ़ जाती है।

2.) कूटकटेरी, असगंध, वच और शतावरी को तिल के तेल में जला कर लिंग पर लेप करने से लिंग में वृद्धि होती है।
3.) असगंध चूर्ण को चमेली के तेल के साथ खूब मिलाकर लिंग पर लगाने से लिंग मज़बूत हो जाता है।

4.) सूखा जौ पीस कर तिल के तेल में मिला कर लिंग पर लगाने से सारे दोष दूर हो जाते हैं।
5.) ग्राम लोंग को 50 ग्राम तिल के तेल में जला कर मालिश करने से लिंग में मजबूती आती है।

6.) हींग को देशी घी में मिलाकर लिंग पर लगा लें और ऊपर से सूती कपड़ा बांध दें। इससे कुछ ही दिनों में लिंग मजबूत हो जाता है।
7.) भुने हुए सुहागे को शहद के साथ पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है।

8.) जायफल को भैंस के दूध में पीसकर लिंग पर लेप करने के बाद ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। सुबह इस पत्ते को खोलकर लिंग को गर्म पानी से धो लें। इस क्रिया को लगभग 3 सप्ताह करने से लिंग पुष्ट हो जाता है।
9.) शहद को बेलपत्र के रस में मिलाकर लेप करने से हस्तमैथुन के कारण होने वाले विकार दूर हो जाते हैं और लिंग मजबूत हो जाता है।

10.) रीठे की छाल और अकरकरा को बराबर मात्रा में लेकर शराब में मिलाकर खरल कर लें। इसके बाद लिंग के आगे के भाग को छोड़कर लेप करके ऊपर से ताजा साबुत पान का पत्ता बांधकर कच्चे धागे से बांध दें। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से लिंग मजबूत हो जाता है।
11.) बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है।

12.) असगंध, मक्खन और बड़ी भटकटैया के पके हुए फल और ढाक के पत्ते का रस, इनमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग लिंग पर करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली बनता है।
दालचीनी का तेल, बादाम का तेल, जमालगोटा का तेल और पिस्ता का तेल इन सभी तेल को समान मात्रा में लेकर एक साथ मिलाकर रख लें। इसे एक बूद की मात्रा में रात को सोेते समय इंद्रिय पर लगाये और ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। इसका प्रयोग एक महिने तक करने से लिंग का टेढापन, पतलापन एंव असमानता दूर हो जाती है और वो शक्तिशाली हो जाता है।

क्रेडिट: इंसिस्ट पोस्ट

सात फेरों (सात वचन) का धार्मिक महत्व!!!


वैदिक संस्कृति के अनुसार सोलह संस्कारों को जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार माने जाते हैं। विवाह संस्कार उन्हीं में से एक है जिसके बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं हो सकता। हिंदू धर्म में विवाह संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है।
विवाह का शाब्दिक अर्थ:-

विवाह= वि + वाह, अतः इसका शाब्दिक अर्थ है, विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है । अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का करार होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच जन्म–जन्मान्तरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता । अग्नि के सात फेरे लेकर और ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो तन, मन तथा आत्मा एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं । हिन्दू विवाह में पति और पत्नी के बीच शारीरिक संम्बंध से अधिक आत्मिक संम्बंध होता है और इस संबंध को अत्यंत पवित्र माना गया है ।
जानिए क्या हैं सात फेरों के सात वचन:-

विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है।

प्रथम वचन:- तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:! वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!

अर्थात:- यहाँ कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

किसी भी प्रकार के धार्मिक कृ्त्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नि का होना अनिवार्य माना गया है। जिस धर्मानुष्ठान को पति-पत्नि मिल कर करते हैं, वही सुखद फलदायक होता है। पत्नि द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नि की सहभागिता, उसके महत्व को स्पष्ट किया गया है।
द्वितीय वचन:- पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:! वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!

अर्थात:- कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

यहाँ इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है। आज समय और लोगों की सोच कुछ इस प्रकार की हो चुकी है कि अमूमन देखने को मिलता है–गृहस्थ में किसी भी प्रकार के आपसी वाद-विवाद की स्थिति उत्पन होने पर पति अपनी पत्नि के परिवार से या तो सम्बंध कम कर देता है अथवा समाप्त कर देता है। उपरोक्त वचन को ध्यान में रखते हुए वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए।

तृतीय वचन:- जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात! वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!

अर्थात:- तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे ये वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ।
चतुर्थ वचन:- कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:! वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!

अर्थात:- कन्या चौथा वचन ये माँगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूँ।

इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उतरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृ्ष्ट करती है। विवाह पश्चात कुटुम्ब पौषण हेतु पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है। अब यदि पति पूरी तरह से धन के विषय में पिता पर ही आश्रित रहे तो ऐसी स्थिति में गृहस्थी भला कैसे चल पाएगी। इसलिए कन्या चाहती है कि पति पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर होकर आर्थिक रूप से परिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सक्षम हो सके। इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए जब वो अपने पैरों पर खडा हो, पर्याप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे।
पंचम वचन:- स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा! वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!

अर्थात:- इस वचन में कन्या जो कहती है वो आज के परिपेक्ष में अत्यंत महत्व रखता है। वो कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

यह वचन पूरी तरह से पत्नि के अधिकारों को रेखांकित करता है। बहुत से व्यक्ति किसी भी प्रकार के कार्य में पत्नी से सलाह करना आवश्यक नहीं समझते। अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नी से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान तो बढता ही है, साथ साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है।
षष्ठम वचन:- न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत! वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!

अर्थात:- कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

वर्तमान परिपेक्ष्य में इस वचन में गम्भीर अर्थ समाहित हैं। विवाह पश्चात कुछ पुरुषों का व्यवहार बदलने लगता है। वे जरा जरा सी बात पर सबके सामने पत्नी को डाँट-डपट देते हैं। ऐसे व्यवहार से पत्नी का मन कितना आहत होता होगा। यहाँ पत्नी चाहती है कि बेशक एकांत में पति उसे जैसा चाहे डांटे किन्तु सबके सामने उसके सम्मान की रक्षा की जाए, साथ ही वो किन्हीं दुर्व्यसनों में फँसकर अपने गृ्हस्थ जीवन को नष्ट न कर ले।
सप्तम वचन:- परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या! वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!

अर्थात:- अन्तिम वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

विवाह पश्चात यदि व्यक्ति किसी बाह्य स्त्री के आकर्षण में बँध पगभ्रष्ट हो जाए तो उसकी परिणिति क्या होती है। इसलिए इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।

सात का महत्व:-

इस तथ्य को समझाने के लिए ही सप्तपदी या सात वचनों को संगीत के सात सुर, इंद्रधनुष के सात रंग, सात तल, सात समुन्द्र, सात ऋषि, सातों लोकों आदि का उल्लेख किया जाता है। असल बात शरीर, मन और आत्मा के स्तर पर एक्य स्था स्थापित करना है जिसे जन्म जन्मान्तर का साथ कहा जा सके।

Sunday, February 19, 2017

मिसकैरेज से अगर बचना है तो जरूर अपनाएं ये टिप्स


विवाह भारतीय संदर्भ में सामाज और परिवार निर्माण की पहली कड़ी है। विवाह के समय दो अनजान व्यक्ति प्रेम की अटूट डोर में बंधते है। दोनों की यह डोर टूटने न पाए, इसके लिए जरूरी है कि उनके रिश्तों में विश्वास की नींव मजबूती से बरकरार रहे। जैसे ही इस रिश्ते में किसी तीसरे का आगमन होता है, नींव दरकने लगती है।

बेबी बर्थ या काफी कष्टदायक लेबर पेन और डिलीवरी की वजह से गर्भाशय और उसके आसपास की मांसपेशियां ढीली पड जाती हैं। इसके अलावा सामान्य तौर पर महिलाओं की बढती उम्र में इस्ट्रोजन हारमोन की कभी होने लगती है। इससे कमजोर पडती मांसपेशियों से गर्भाशय पूरी तरह वेजाइना के बाहर लटकने लगता है।
शोधकर्ताओं को बतायी शोचनीय थी। बच्चे के जन्म के एक हफ्ते के भीतर भारी बोझ उठाने का काम या पति द्वारा संबंध बनाने की जबर्दस्ती उनके शरीर को हर बार नाजुक स्थिति में पहुंचा देती है।
घरेलू टिप्स से पेल्विस ऑर्गन प्रोलैप्स में असहजता से छुटकारा मिलेगा। यह स्थिति को बहुत गंभीर बनने से भी रोकेगा।
पूरे दिन में ठीक मात्रा में पानी पिएं। हाई फाइबर डाइट खाएं। अपनी डाइट में रोज फल और हरी सब्जियां शामिल करें।
अगर आपका कब्ज तब भी सही नहीं होता है, तो स्टूल सॉफ्टनर दवा खाएं, जैसे इसबगोल, जिससे वेजाइना पर दबाव पडे बिना पॉटी हो।
कब्ज की वजह से वेजाइना वॉल पर दबाव पडता है और वह कमजोर पडने लगती है। पेल्विस की मांसपेशियां और उससे जुडी कोशिकाओं को भी हानि पहुंचती है।

दुनिया की 12 सबसे खतरनाक जगह, जहां से आज तक कोई वापस नहीं आया!!


हम में से हर कोई एक सुरक्षित जगह में रहना और जाना पसंद करता है, लेकिन विश्व में कुछ ऐसे भी स्थान हैं, जहां इंसान के जीवन के लिए बहुत अधिक खतरा है। इनमे से कुछ खतरनाक स्थानों में आज भी लोगों को जाने की मनाही है। इन जगहों में से कुछ स्थानों पर तो ऐसे खतरे हैं, कि स्थिति अगर थोड़ा सा भी बदल जाए तो लाखों लोग मौत के मुंह में जा सकते हैं। आज हम आपको धरती के कुछ ऐसे ही खतरनाक स्थानों के बारे में बताएँगे।

आपने बरमूडा ट्राएंगल (Bermuda Triangle) के बारे में तो सुना ही होगा. जहां जाने वाला आज तक वापिस नहीं आया। आज भी वैज्ञानिक इस रहस्य का पता लगाने में लगे हुए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि बरमूडा ट्राएंगल (Bermuda Triangle) अपने तरीके की इकलौती जगह है। दुनिया में ऐसी रहस्यमय जगहों की भरमार है जिनके रहस्यों की किताब अभी तक खुली भी नहीं है।

1. सुपरस्टीशन माउंटेन्स: Superstition Mountains, Arizona (USA)
लोगों की मानें तो सन् 1800 के आस पास Jacob Waltz नाम के शख़्स ने इन पहाड़ों के बीच एक सोने की खदान खोज निकाली थी। लेकिन उसने कभी इस बात को किसी के सामने ज़ाहिर नहीं होने दिया और उसकी मौत के साथ ये राज़ भी दफ़न हो गया। कुछ और कहानियों में कहा गया है कि उस सोने की खदान को खोजने के चक्कर में बहुत लोगों ने अपनी जान गवांई है, लेकिन उनकी रूह आज भी उसकी तलाश में हैं. इस सोने की खदान से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी ये भी है कि उसकी सुरक्षा Tuar-Tums (छोटे लोग) नाम के लोग करते हैं और उस खदान का रास्ता नरक तक जाता है।

2. साउथ अटलांटिक अनोमली: South Atlantic Anomaly, SAA (Earth’s inner Van Allen Radiation Belt )

आपने सोचा है Bermuda Triangle जैसा कुछ स्पेस में हो तो क्या होगा? सोचिए मत क्योंकि सच में ऐसी एक जगह है स्पेस में। South Atlantic Anomaly नाम से पहचाने जाने वाले इस एरिया में आज तक जो भी स्पेस प्लेन गया है वहां से वापिस नहीं आ पाया।
3. लेक एंगिकुनी: Lake Anjikuni, Canada

ये वाकया है 1930 का जब Joe Labelle नाम का एक शिकारी रात के वक़्त अपने लिए जगह तलाश रहे थे, Joe Labelle उस जगह से अच्छी तरह वाकिफ़ थे, Joe Labelle को पता था कि वहां एक आदिवासी कबिला है जहां उन्हें शरण मिल जाएगी। लेकिन जब वो वहां पहुंचे तो वहां एक भी इंसान नहीं था. जबकि हर चीज़ सही थी। यहां तक की वहां रहने वाले अपना खाना भी साथ लेकर नहीं गए थे। Joe Labelle ने इस बारे में RCMP को बताया। जांच शुरू हुई जिसके बाद उन्हें एक गुफ़ा में गांव वालों की लाश मिली। लेकिन उससे पता नहीं चल रहा था कि वहां हुआ क्या है। कुछ लोग मानते हैं कि वहां एलियन्स ने हमला किया था तो कुछ भूतों की कहानी से इसे जोड़ते हैं. हुआ कुछ भी हो, लेकिन इसका पता आज तक नहीं चल पाया है।
4. द डेविल समुन्दर : The Devil’s Sea (south of Tokyo), Japan

जापान के पास Pacific Ocean में एक जगह को Devil’s Sea कहा जाता है. इस नाम का एक कारण है. इस जगह के पास से जो भी निकला है वो कभी नहीं मिला. 1952 में इस जगह की जांच के लिए जापान सरकार ने 31 लोगों का ग्रुप भेजा था. लेकिन वो लोग भी कभी वापिस नहीं आ पाए। ये भी कहा जाता है कि Kublai Khan ने जापान पर हमले के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल किया था. लेकिन वो जापान के पास भी नहीं पहुंच पाया था और उसे अपने 40,00 से ज़्यादा लोगों की जान भी गवांनी पड़ी थी।
5. बिगेलो रैंच : Bigelow Ranch (southeast of Ballard), Utah

इस जगह के साथ एक अजीब कहानी जुड़ी है. 480 एकड़ में फैली इस जगह को देखने 1994 में दो लोग Terry और Gwen गए थे. उन्होंने इस जगह पर एक लोमड़ी दिखी जो सामान्य आकार से काफ़ी बड़ी थी। उस लोमड़ी ने इन लोगों पर हमला कर दिया. उन्होंने अपनी पिस्तौल से उस पर फायरिंग की लेकिन पिस्तौल की गोली से उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ा. इन लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, इस जगह पर होने वाली ऐसी हरकत यहीं नहीं रुकी उन्हें रोज़ कुछ न कुछ अजीब दिखता. उन्होंने अपनी इस जगह को बेच दिया आज इस जगह पर कई रिसर्च टीम एक साथ काम कर रही हैं, लेकिन अभी तक उन्हें किसी भी तरह की कामयाबी नहीं मिली।
6. पॉइंट प्लीजेंट: Point Pleasant, Ocean County, New Jersey, United States

सन् 1966-67 के बीच West Virginia में एक अजीब सी चीज़ देखने को मिली थी. वहां के कई लोगों ने एक उड़ने वाले शख्स को देखने की बात कही थी जो करीब 7 फ़ीट लम्बा था और उसकी आंखें चमकीली थीं. लेकिन 1967 के अगस्त में वहां Silver Bridge के गिरने के बाद उस चीज़ को कभी नहीं देखा गया. वहां के लोग मानते हैं कि इस हादसे में उस की मौत हो गई थी. कई लोगों ने इसे एलियन बोला, तो कुछ का कहना था कि वो एक Mutant था. लेकिन यकीन से कोई भी कुछ नहीं कह सकता था।
7. मिशिगन ट्राएंगल: Michigan Triangle, Michigan, उस

Bermuda Triangle की तरह इस Michigan Triangle के भी कई किस्से हैं. कहा जाता है कि वहां से गुजरने वाले किसी भी प्लेन का आज तक पता नहीं चला. 1937 में Captain George नाम के एक पायलेट ने Michigan Triangle की तरफ़ उड़ान भरी थी जिसके बाद आज तक न उस पायलेट की कोई खबर मिली, न ही उस प्लेन की. लेकिन ये ही एक किस्सा नहीं है. एक और किस्से में एक सवारी प्लेन ने 1950 में खराब मौसम की वजह से Michigan Triangle की तरफ़ का रुख़ किया था, और उसके बाद आज तक उस प्लेन का कोई भी सुराग नहीं मिला है. ऐसे न जाने दर्जनों किस्से हैं इस Michigan Triangle के…
8. सान लुइस वैली : San Luis Valley, Colorado, USA

इस जगह को एलियन का गढ़ कहा जाता है. दुनिया में अब तक सबसे ज़्यादा UFO देखने की बात इसी जगह से आई हैं. Snippy नाम के शख्स की लाश इस जगह मिली थी, जिसके शरीर से उसका दिमाग गायब था साथ ही उसकी रीढ़ की हड्डी भी गायब थी. वहां कई बार जानवरों की लाश भी इसी हालत में पाई गई है. वहां के लोग मानते हैं कि एलियन वहां आते हैं, और ये काम उन्हीं का है. यहां तक कि वहां के कई पालतू जानवर गायब होने की बात कहीं जाती रही है. लेकिन आज तक किसी भी जानवर की कोई खबर नहीं मिली है।
9. बेननिंगटन ट्राइएंगल: Bennington Triangle, Vermont, USA

Bennington Triangle एक ऐसी जगह है जो दिखने में जितनी खूबसूरत लगती है उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है. इस जगह से जुड़े कई केसेस हैं जिनकी तहक़ीक़ात आज भी जारी है. 1945 में शिकारियों का पूरा समूह इस जगह गया था लेकिन वहां से कोई भी वापिस नहीं आ पाया. Paula Welden नामक एक लड़की भी इस जगह पहाड़ों पर घूमने गई थी जिसकी भी इसके बाद कोई खबर नहीं मिली. 1950 में एक महिला ने भी इस जंगल में जाने की गलती की थी, उसकी भी मौत हो गई. ये पहला केस था जिसमे मरने वाले का शरीर मिला था. कुछ लोगों का कहना है कि उस जगह बिग फ़ुट रहता है. कुछ मानते हैं यहां एलियन्स है। लेकिन यकीन से कोई भी कुछ नहीं बोल सकता।
10. ब्रिजवाटर ट्राइएंगल: Bridgewater Triangle, Massachusetts, United स्टेट्स

इसे अजीब जानवरों का जंगल भी कहा जाता है. यहां कई लोगों ने अलग अलग तरह के जानवर देखे हैं. कुछ का कहना है कि उन्होनें एक कुत्ते को देखा है जो सामान्य आकार से काफ़ी बड़ा था तो कुछ बताते हैं कि इस जंगल में बहुत बड़ी Thunder birds हैं. और कुछ इस जंगल को एलियन्स से जोड़ कर देखते हैं. 1760 में यहां एक उल्का पिंड गिरा था. कहा जाता है कि वह कुछ औऱ नहीं बल्कि एक स्पेस शिप था जिसमें एलियन आए थे. ऐसी न जाने कितनी कहानियां जुड़ी हैं इस जगह से. लेकिन और रहस्यमयी जगहों की तरह यहां का रहस्य भी आज तक खुल नहीं पाया है।
11. हाइवे 16: Canada

कैनेडा और बिट्रिश कोलंबिया में स्थित इस हाइवे पर भी बहुत से लोगों के गायब होने की खबरें हैं। इस हाइवे से एकसाथ 18 महिलाएं गायब हो चुकी हैं। साल 1975 में मोनिका इगनास वो पहली महिला थी जो यहां से गायब हुई थीं। गायब होने के लंबे समय बाद उनकी बॉडी एक सुनसान जगह पर पाई गई थी। लेकिन उनके बाद गायब हुई अन्य महिलाओं को आजतक न देखा गया और न ही उनके बारे में कोई जानकारी पाई है।
12. अमरीका का नेशनल पार्क:-

यह पार्क पूरे 84 मिलियन एकड़ में फैला हुआ है। यह चारों ओर से घने जंगलों, मरूस्थलों और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ से घिरा हुआ है। इस घने जंगल में आने वाला कोई भी आज तक वापस नहीं आ पाया है। इस पार्क के इसी रहस्य को ऑर्थर डेव्ड पॉलीडेस ने अपनी किताब मिसिंग 411 में लिखा है। किताब में लगभग 1100 लोगों के गायब होने की घटनाओं के बारे में जिक्र किया गया है।
दुनिया में न जाने कितनी ऐसी जगहें होंगी जिनके अंदर अनगिनत राज़ छिपे हैं, और आज भी उन राज़ों से पर्दा नहीं उठ पाया है. आप भी अपने दोस्तों को इन रहस्यों के बारे में बताएं, लेकिन यहां जाने की कभी न सोचें।
साभार: विन्हिन्न हिंदी वेबसाइट

श्याम रंगीला द्वारा पीएम मोदी, राहुल गाँधी और केजरीवाल की गजब मिमिक्री! मजा न आये तो कहना!!

श्याम रंगीला की गजब की मिमिक्री….
सुनिये श्याम रंगीला से हमारे देश के कई बड़े नेताओ की ऐसी मिमिक्री जिसे आप ने पहले कभी नहीं सुना होगा श्याम रंगीला पीएम मोदी, राहुल गाँधी और केजरीवाल व लालू जी की मिमक्री करते है जिसे सुन कर आप अपनी हँसी नहीं रोक पायेगे।

देखिये वीडियो और शेयर करना न भूले…

पतले हैं, गाल पिचके हुए हैं तो करें ये 11 घरेलु रामबाण उपाय


वजन बढ़ाने और पतलेपन से मुक्ति पाने के लिए:-
अगर आप कमज़ोर हो, पतले हो, गाल पिचके हुए हैं, चेहरे पर लाली नहीं हैं और बहुत खाने के बाद भी आप कमज़ोर हो तो करें ये कुछ घरेलु रामबाण उपाय और थोड़े दिनों में देखे अपने शरीर और चेहरे की रंगत!!
जिस तरह लोग मोटापे से परेशान हैं उसी तरह लोग पतलेपन से भी परेशान हैं। दुर्बल शरीर होना भी उपहास का विषय बन जाता हैं। अगर कमज़ोर व्यक्ति इन पदार्थो को अपने भोजन में शामिल करेगा तो वो कुछ ही दिनों में मोटा ताज़ा, सुन्दर और आकर्षक हो जायेगा।

पतलापन दूर करने के 11 उपाय:-

1. बादाम और मक्खन:-
प्रतिदिन 5 बादाम भिगो कर, पीसकर, 5० ग्राम मक्खन में स्वादनुसार शक्कर मिला कर ताजी गेंहू की रोटी से नित्य खाए और खाकर 15 मिनट बाद गर्म दूध पिए। आप देखेंगे की सिर्फ दो-तीन महीने में मोटापा बढ़ जाएगा। मस्तिष्क भी तेज़ होगा। सर्दी के मौसम में यह प्रयोग विशेष लाभ देता हैं।

2. अश्वगंधा और शतावरी:-
आयुर्वेद में अश्वगंधा और शतावरी के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है। अश्वगंधा और शतावर का चूर्ण मिक्स कर ले, अब इस में बराबर मात्रा में मिश्री मिला लीजिये, रात को सोते समय या कसरत करने के बाद एक चम्मच फांकी ले कर ऊपर से गर्म दूध पीजिये। एक महीने में ही शरीर का रूप रंग और दीन डौल बदल जायेगा।

3. अखरोट का सेवन:-

अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है। रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से बढ़ता है।

तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये। सुबह उठकर रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा। 3 केले खा कर ऊपर से गर्म दूध पिए। कुछ लोग केले को शेक बना कर पीते हैं, ऐसा ना करे।
5. मुनक्का का सेवन:-

5 से 10 मुनक्का नित्य रात को खाकर पानी पीकर सोएं। एक दो महीने में ही सारी दुर्बलता दूर होकर शरीर का वजन बढ़ेगा, शरीर मोटा हो जायेगा।
6. अंजीर का सेवन:-

शरीर का वजन घटता जा रहा हो, दिनों दिन शरीर पतला हो रहा हो, जवानी में ही बुढ़ापा झलकने लगे तो रात को आधा गिलास पानी में ३ अंजीर और ३ चम्मच सौंफ भिगो दे। प्रात: पानी छानकर अंजीर निकाल कर खाए और वही पानी पी जाए। ऐसा 45 दिन तक करने से वजन बढ़ जायेगा, शरीर मोटा हो जायेगा।
अंजीर दूध में उबाल कर खाने से और ऊपर से वही दूध पीने से भी मोटापा बढ़ता हैं और कमज़ोरी दूर होती हैं।

7. खजूर और चना:-

5 खजूर और एक मुट्ठी काले चने धोकर रात को थोड़े से पानी में भिगो कर प्रात: खाएं, मोटापा बढ़ेगा, कमज़ोरी दूर होगी।
8. छुहारे का सेवन:-
रात को सोते समय चार छुहारे, गुठली निकाल कर एक गिलास दूध में डालकर उबाले, छुहारे चबा चबा कर खा लीजिये और ऊपर से दूध पी लीजिये। और इसी प्रकार सुबह नाश्ते में भी यही प्रयोग करे। यह प्रयोग सर्दी के मौसम में लगातार ३ महीने तक करे। शरीर मोटा और सुन्दर होगा। बल बढ़ेगा और यौन शक्ति भी बढ़ेगी। यह प्रयोग सभु आयु के स्त्री पुरुष कर सकते हैं।
9. मूंगफली का सेवन:-

मूंगफली खाने से कुपोषण से बचाव होता हैं, शारीरिक शक्ति बढ़ती हैं। मूंगफली खाने से, या इसकी खीर खाने से मोटापा बढ़ता हैं।

10.आलू का सेवन:-

आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है। ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है।

11. अनार और चुकंदर:-

अनार और चुकंदर ये दोनों मांस और रक्त बढ़ाने वाले फल हैं। अत: नियमित एक अनार और एक चुकंदर का सेवन करना चाहिए। और सुबह उठ कर नित्य कर्म से फ्री हो कर कसरत ज़रूर करे।
आइये अब जानते हैं पतलेपन के कारण:-
कई बार बहुत लोग खाते पीते बहुत हैं। मगर फिर भी उनका वजन नहीं बढ़ता और वो कमज़ोर ही लगते हैं। ऐसे में ज़रूरी हैं उन बातो को समझना जिन कारणों की वजह से आपका शरीर भोजन को सही से पचा नहीं पा रहा। आइये जाने ये कारण और इनका निवारण।

बहुत खाने के बाद भी अगर आप कमज़ोर हो तो इसके सबसे बड़े कारण हैं नशा, भूख ना लगना, या पाचन तंत्र सही ना होना।
सबसे पहले तो अगर आप नशा करते हैं, चाहे किसी भी तरह का नशा हो उसको छोड़ दीजिये। दूसरा ये के अगर आपको भूख नहीं लगती तो भोजन करने से 10 मिनट पहले अदरक का आचार खाया करे। या फिर भोजन के साथ भी ये खा सकते हैं। और तीसरा कारण हैं भोजन सही ना पचना जिसका कारण हैं लिवर का कमज़ोर होना तो उसके लिए सुबह शौच जाने के बाद एक गिलास गर्म पानी में एक निम्बू निचोड़ कर पिए बिना चीनी डाले। इस से उनके लिवर में जो समस्या हैं वो समाप्त होगी।

इसके बाद सुबह हल्का व्यायाम ज़रूर करे। जिसमे दंड मारने और दंड बैठक करना विशेष हैं। अगर तैराकी का समय मिले तो तैराकी अवश्य करनी चाहिए।
हर रोज़ सुबह शौच करने के बाद आधा घंटा प्राणायाम और योगासन ज़रूर करे, जिनमे विशेष कपाल भाति प्राणायाम हैं।

ये ज़रूर ध्यान रखे के ज़्यादा खाने से या ज़्यादा कसरत करने से शरीर नहीं बनता बल्कि हलकी कसरत और कम खाओ मगर पचाओ अधिक इस मंत्र से शरीर सुदृढ़ मज़बूत और मोटा ताज़ा होगा।

इसके बाद आप जो कुछ भी खाएंगे तो वो आपके शरीर को लगने लगेगा। चाहे सादा पानी ही क्यों ना पिए। और आपको सिर्फ दो – तीन महीने में ही फर्क दिखने लगेगा।
साभार: ओनलीआयुर्वेद.कॉम  

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